आचार्य महाप्रज्ञ शताब्दी समारोह में राज्यपाल त्रिपाठी “राष्ट्रीय प्रज्ञा सम्मान” से विभूषित

  • आधुनिक युग के विवेकानन्द थे महात्मा महाप्रज्ञ-  स्वामी विश्वात्मानन्द महाराज

कोलकाता। आचार्य महाप्रज्ञ शताब्दी वर्ष पर महानगर मीडिया ग्रुप द्वारा आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी को राष्ट्रीय प्रज्ञा सम्मान से विभूषित किया गया।बंगाल चेम्बर के खचाखच भरे विशाल हॉल में राज्यपाल त्रिपाठी ने अपने भावपूर्ण सम्बोधन में आचार्य महाप्रज्ञ को भारतीय ऋषि परम्परा का उज्ज्वल नक्षत्र औऱ सदी का महानतम सन्त कहा। उन्होंने कहा कि जैनाचार्य महाप्रज्ञ महात्मा थे। वे किसी भी धर्म की सीमा से काफी ऊपर थे। प्राणी मात्र के कल्याण के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन लगाया। तत्कालीन राष्ट्रपति डा. एपीजे कलाम जैसे महान वैज्ञानिक के साथ मिलकर उन्होंने विश्व शान्ति की दिशा में गहन रचनात्मक कार्य किए। एक लाख किलोंमीटर से अधिक की पदयात्रा, 300 से अधिक पुस्तकों की रचना, प्रेक्षा ध्यान और जीवन विज्ञान जैसे विषयों के माध्यम से उन्होंने समाज औऱ देश को एक नयी दिशा दी। जीवन के नौं वे दशक में इस महान सन्त ने अहिंसा यात्रा शुरू की और करोड़ों लोगों का हृदय परिवतिर्त करते हुए लोगों को सदभावना, नैतिकता और नशामुक्ति की सीख दी। राज्यपाल को सम्मान स्वरूप श्रद्धा की प्रतिमूर्ति श्रीमती संतोष चोरड़िया ने तिलक किया फिर अतिथियों ने शॉल, श्रीफल, सम्मान पत्रक, साहित्य आदि भेंट किए गए. सम्मान स्वरूप प्रदान की गयी एक लाख रुपए की सम्मान राशि को उन्होंने राजर्षि पुरुषोत्तम दास टण्डन द्वारा स्थापित प्रयागराज के एक विद्यालय को सौंपने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि महाप्रज्ञजी के नाम से दिए जाने वाले इस सम्मान का विशेष महत्व है। यह मुझे हमेशा प्रेरित करता रहेगा।

भारत सेवाश्रम संघ के प्रधान सन्त स्वामी विश्वात्मानन्द जी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में आचार्यप्रवर के सुशिष्य एवं जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय के चांसलर रहे सुरेंद्र कुमार चोरड़िया ने युरोप से अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की। तेरापंथी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हंसराज बेताला एवं महामंत्री विनोद बैद ने भी अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। समारोह में राजेन्द्र बच्छावत, हरिकिशन राठी, ओम जालान, प्रदीप कुण्डलिया, रतन लाल पारख व रणजीत कोठारी सरीखे धर्मनिष्ट सुशिष्य अतिथि बतौर उपस्थित थे। स्वामी विश्वात्मानन्दजी महाराज ने कहा कि पृथ्वी का सन्तुलन सन्तों से ही बना रहता है। ऋषि मुनि सन्त भारत की आत्मा हैं। आचार्य महाप्रज्ञ को आधुनिक युग का विवेकानन्द कहा जा सकता है। उनका योगदान कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। वे धर्म की सीमा से काफी ऊपर थे। मानवता की रक्षा हेतु उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया।

इस अवसर पर डा. उर्मिला बिनायकिया, डा. अमित बागड़ोदिया, डा. नेहा डागा, डा. हेमांशी बैद, अशोक गंगवाल एवं डा. रोहित नाहटा तथा सूरज बरड़िया को विशिष्ट प्रतिभा सम्मान, तेरापंथ युवक परिषद पूर्वांचल, ईस्ट कोलकाता नागरिक फाउण्डेशन एवं तेरापंथ युवक परिषद टालीगंज को विशिष्ट सेवा सम्मान तथा हावड़ा की तपस्विनी श्राविका सम्पत देवी दुगड़ को तपसाधना सम्मान एवं प्रतिभाशाली छात्र छात्राओं को मेधा सम्मान देकर पुरस्कृत किया गया।

सर्वश्री सुमेर मल सुराणा, छत्तर सिंह बैद, कुन्दनमल बैद, डा. अशोक बिनायकिया, विजय चोरड़िया, श्रीपत सिंह चण्डालिया, प्रकाश बैद, राजेन्द्र पटावरी, दिनेश जैन, प्रमोद बैद, चम्पा देवी कोठारी, तारा देवी सुराणा, पार्षद मीना पुरोहित, प्रमोद दुगड़, जतन पारख, प्रमोद चण्डालिया, पत्रकार आलोक खटेड़ (सम्पादक भारतीय समाज), बुधमल लूणिया, सम्पतमल बच्छावत, जगदीश जाजू, लक्ष्मीकान्त तिवारी, आनन्द बैद, एस पी बागला, निर्मल सराफ, बंशीधर शर्मा, सुशील ओझा, विद्यासागर मंत्री, निर्मल भूतोड़िया, निर्मल जैन, नवरतन मल बरमेचा, जुगराज दुधोड़िया, विमल बैंगानी, संजय सिंघी, विजय सिंह दुगड़, राकेश दुगड़, रायचन्द सुराणा, सुशील अग्रवाल सुभाष शर्मा, संदीप गर्ग, राकेश दुगड़, अरूण मल्लावत, डा. तारा दुगड़,बंशीधर शर्मा, पवन अग्रवाल, वीणा दुगड़ सरीखे विशिष्ट जन उपस्थित थे। महानगर मीडिया ग्रुप के प्रबन्ध सम्पादक राकेश चण्डालिया ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि समारोह की सफलता हेतु प्रभात जैन, चिराग, शिल्पी व चमन चण्डालिया,गौतम दुगड़, आदि सक्रिय थे। महानगर मीडिया के प्रधान सम्पादक व मुख्य आयोजक प्रकाश चण्डालिया ने समारोह की संचालन करते हुए आचार्य महाप्रज्ञ के जीवन से जुड़े अनेकानेक प्रसंगों को बड़े ही रोचक ढंग से लोगों के सामने प्रस्तुत किया।

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