मेरी तबियत खराब, ना सौंपे कोई जिम्मेदारी : जेटली

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिख अपील की है कि उन्हें मंत्री बनाने का विचार ना किया जाए। जेटली ने अपने खत में लिखा है कि पिछले 18 महीने से उनकी तबीयत खराब है ऐसे में वह जिम्मेदारी को नहीं निभा पाएंगे, इसलिए उन्हें मंत्री बनाने पर कोई विचार ना करें।

अरुण जेटली पीएम मोदी को खत में लिखते हैं कि यह उनके लिए सम्मान की बात है कि आप की अगुवाई में वो पांच साल तक एनडीए सरकार का हिस्सा बने रहे। इससे पहले भी पार्टी ने उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी। न केवल सरकार में बल्कि पार्टी में अलग अलग पदों पर उन्हें जिम्मेदारी गी गई। मैं इससे ज्यादा और कुछ नहीं कह सकता।

दरअसल, किडनी संबंधी बीमारी से ग्रसित अरुण जेटली का पिछले साल मई में किडनी प्रत्यारोपण हुआ था। लेकिन किडनी के साथ-साथ जेटली कैंसर से भी जूझ रहे हैं। उनके बायें पैर में सॉफ्ट टिशू कैंसर हो गया है जिसकी सर्जरी के लिए जेटली इसी साल जनवरी में अमेरिका भी गए थे। फिलहाल वह कीमो के दौर से बाहर आने की कोशिश कर रहे हैं।

वैसे तो हमारे शरीर में कई तरह के सॉफ्ट टिशू ट्यूमर होते हैं लेकिन सभी कैंसरस नहीं होते। सॉफ्ट टिशू में कई मामूली ट्यूमर भी होते हैं जिसका मतलब है कि इनमें कैंसर नहीं होता और वे शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल नहीं सकते। लेकिन जब इस तरह की बीमारी के साथ सार्कोमा शब्द जुड़ जाता है तो इसका मतलब है कि उस ट्यूमर में कैंसर विकसित हो गया है और वह घातक है।

सार्कोमा एक तरह का कैंसर है जो हड्डी या मांसपेशियों के टिशू में शुरू होता है। बोन और सॉफ्ट टिशू सार्कोमा मुख्य तरह का सार्कोमा होता है। सॉफ्ट टिशू सार्कोमा, फैट, मसल्स, नर्व्स, फाइबर टिश्यू, रक्त धमनियां या फिर डीप स्किन टिशू में विकसित होता है। वैसे तो ये शरीर के किसी भी हिस्से में पाए जा सकते हैं लेकिन मुख्य तौर पर सॉफ्ट टिशू कैंसर की शुरुआत हाथ या पैर से होती है। 50 से भी ज्यादा अलग-अलग तरह का होता है सॉफ्ट टिशू सार्कोमा। इनमें से कुछ तो बेहद रेयर होते हैं।

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