एनडीए को सत्ता से दूर रखने के लिए पीएम पद का ‘त्याग’ करने को भी तैयार: कांग्रेस

नई दिल्ली.:  ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस लोकसभा चुनाव के नतीजों को पहले ही पढ़ चुकी है. यही वजह है कि अब उसके बयान मतगणना बाद के परिदृश्य को लेकर उभरने वाले सियासी समीकरणों को ही सामने ला रहे हैं. वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद का हालिया बयान भी इसकी ही एक कड़ी कहा जा सकता है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को प्रधानमंत्री पद की कोई लालसा नहीं है. केंद्र से एनडीए को दूर रखने के लिए अगर जरूरत पड़ेगी तो कांग्रेस किसी और राजनीतिक पार्टी के पीएम पर भी सहमत हो सकती है.

लक्ष्य बस एनडीए को सत्ता से दूर रखना

आजाद ने कहा, ‘हम पहले ही कह चुके हैं कि यदि कांग्रेस के पक्ष में सहमति बनती है तो हम नेतृत्व स्वीकार करेंगे. हमारा लक्ष्य हमेशा यह रहा है कि एनडीए की सरकार सत्ता में वापस नहीं लौटनी चाहिए. हम सर्वसम्मति से लिए गए फैसले के साथ जाएंगे.’ कांग्रेस नेता का यह कहना साफतौर पर संकेत करता है कि कांग्रेस ने 23 मई को मतगणना के बाद आने वाले चुनाव परिणाम को भांप लिया है. बीजेपी को रोकने की लिए गठबंधन में पीएम पद जैसे बड़े त्याग के लिए भी तैयार है.

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी दी थी चुनौती

कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘जब तक हमें पीएम का पद ऑफर नहीं किया जाता है, हम इस बारे में कुछ नहीं कहेंगे और किसी के भी जिम्मेदारी संभालने पर ऐतराज नहीं होगा.’ यहां यह भूलना नहीं चाहिए कि मंगलवार को ही गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा था कि यदि महागठबंधन को आम चुनाव में जीत का भरोसा है, तो उन्हें प्रधानमंत्री पद के अपने उम्मीदवार की घोषणा कर देनी चाहिए।

सिब्बल भी स्वीकार कर चुके हैं कि नहीं आ रही कांग्रेस

इसके पहले कांग्रेस के दिग्गज नेता कपिल सिब्बल ने भी कहा था कि उनकी पार्टी को बहुमत मिलने का चांस नहीं है. एक इंटरव्यू में कांग्रेस नेता ने कहा था कि कांग्रेस को अपने दम पर बहुमत मिलने का चांस नहीं है, लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन की सरकार बन सकती है. यही नहीं, कपिल सिब्बल ने कहा कि यदि कांग्रेस को आम चुनाव में 272 सीटें मिलती हैं तो फिर राहुल गांधी को पीएम पद के लिए नामित करना चाहिए.

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