सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तेज बहादुर यादव

नई दिल्ली: बर्खास्त बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव ने सुप्रीम कोर्ट में वाराणसी लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में नामांकन खारिज करने को चुनौती दी। अधिवक्ता प्रशांत भूषण तेज बहादुर का केस सुप्रीम कोर्ट में लड़ेंगे।बीएसएफ के पूर्व जवान तेज बहादुर यादव पर जानकारी छिपाने के आरोप में कार्रवाई करते हुए निर्वाचन अधिकारी ने उनका नामांकन रद्द कर दिया था, उसी फैसले के खिलाफ तेज बहादुर यादव ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई है। तेज बहादुर यादव ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में सेवा देते हुए वहां के खाने पर सवाल उठाए थे और सेना की व्यवस्था को सार्वजनिक तौर पर चुनौती दी थी।

तेज बहादुर का यह खुलासा पूरे देश में चर्चा का विषय बना और मामला कोर्ट तक पहुंचा। तेज बहादुर को बीएसएफ से बर्खास्त कर दिया गया। बीएसएफ से बर्खास्तगी का कारण छिपाना ही तेज बहादुर यादव की उम्मीदवारी पर भारी पड़ गया। दरअसल, तेज बहादुर ने पहले वाराणसी सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पीएम मोदी के खिलाफ नामांकन किया था और हलफनामे में बताया था कि उन पर भ्रष्टाचार के आरोप के चलते बीएसएफ से निकाला गया।इसके बाद समाजवादी पार्टी ने बड़ा फैसला लिया और वाराणसी से अपनी प्रत्याशी शालिनी यादव का नाम वापस लेकर तेज बहादुर को प्रत्याशी बना दिया। तेज बहादुर ने दोबारा नामांकन किया और इस बार जो हलफनामा वाराणसी निर्वाचन अधिकारी को दिया उसमें बीएसएफ से निकाले जाने की जानकारी नहीं दी।

इसे आधार मानते हुए वाराणसी निर्वाचन अधिकारी ने तेज बहादुर यादव को नोटिस भेजकर एक तय समयसीमा के अंदर जवाब देने के लिए कहा और जवाब न मिलने पर नामांकन रद्द कर दिया गया. हालांकि, तेज बहादुर ने सबूत मुहैया कराने का दावा करते हुए आयोग पर तानाशाही रवैये का आरोप लगया।तेज बहादुर यादव के वकील ने भी यही बताया कि हमने सभी सबूत दिए, लेकिन बावजूद इसके हमारा नामांकन रद्द कर दिया गया. हालांकि, आयोग से तेज बहादुर को कोई राहत नहीं मिली, जिसके बाद अब तेज बहादुर ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

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