श्रावक संस्कार शिविर सोल्लास संपन्न

रतलाम – संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्या सागर महराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री प्रमाण सागर महराज एवं मुनि श्री विराट सागरजी महराज के सान्निध्य में आयोजित श्रावक संस्कार शिविर सोल्लास संपन्न हुवा।लगभग ढाई हज़ार सेअधिक लोगों के इस शिविर का शुभारम्भ पूज्य मुनि श्री प्रमाणसागर जी महराज के गृहस्थ अवस्था के पिता श्री सुरेन्द्र कुमार जी सेठी ने अपने ज्येष्ठ पुत्र अनिल-संगीता सेठी हज़ारीबाग़ केसाथ ध्वजारोहण पूर्वक किया।कार्यक्रम का समस्त विधि-विधान ब्र-असोक जी के निर्देशन और ब्र-विमल सेठी गया के मार्ग-दर्शन में संपन्न हुवा।मुन्ना पहाड़ियाँ कोलकाता के मधुर स्वरों ने सभी का मन मोह लिया।

 

प्रति दिन पुजन अर्चन प्रवचन तत्वार्थ सूत्र के वाचन और मुनि श्री विराटसागर जी द्वारा कराए गये प्रतिक्रमण के साथ शंका समाधान और आरती केपारम्परिक कार्यक्रम के अतिरिक्त  इस वर्ष पूज्य मुनि श्री प्रमाणसागर  जी महराज द्वारा प्रवर्तित “भावना योग” सभी केलिए विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा।मुनि श्री द्वारा प्रवर्तित यह भावना योग जीवन के रुपान्तरण का अभिनव प्रयोग बन गया।मुनि श्री नेप्राचीन जैन साधना को आधुनिक मनोवैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत करके जन साधारण के लिए सुग्राह्य बना दिया।सामायिक प्रतिक्रमण, प्रत्याख्यान और प्रार्थना जैसी प्राचीन साधना को आधार बनाकर मुनि श्री बड़े ही मनोवैज्ञानिक ढंग भावनायोग कराते थे।मुनि श्री अपने मार्मिक सम्बोधन से सभी कोभावना योग में लीन करअन्तस्करण की शुद्धि के साथ साथ सकारात्मकता की वृद्धिकर और ऊर्जावान बना देते थे।

भावनायोग के सम्बन्ध में मुनिश्रेष्ठ नेबताया कीसम्पुर्ण जैन साधना हमारी भावनाओं पर केन्द्रित है।

आचार्य कुन्द कुन्द ने समयसार में सतत आत्मा कीभावना भाने को कहा है।भावनायोग हमारी पुरानी साधना है।हमारे यहाँ कहा गया है—-यद्भाव्यते तद् भवति।अर्थात हम जैसी भावना भाते हैं हमारा जीवन वैसा ही बन जाता है।इसी प्रक्रिया को पश्चिम के लोग लॉ आफ अट्रेक्शन से जोड़कर देखते हैं।

पुनासे पधारे डाक्टर के एम गंगवाल ने भावनायोग को एक अभिनव क्रान्ति निरुपितकरते हुए कहा किभावनायोग मुनि श्री के अन्वेशनशील मस्तिष्क की खोज है।इससे दुनियाभर के लोगों का उद्धार होगा।

यह एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है।इसे न्युरोसाईको इम्युनोलाजी के नाम सेभीजाना जाता है।

सभी लोगों को भावना योग अतिउपयोगी प्रतीत हुवा।भावना मुनि श्री द्वारा भावनायोग के लिए विशेष रूप से रचितभावना गीत

मंगल मंगल होयजगत् में सब मंगलमय होय लोगों ने ख़ूब पसन्द किया।

समाज के सशक्तिकरण का अभियान—-मुनिश्रीने समाज के सशक्तिकरण की आवश्यकता पर बल देतेहुए पुरेसमाज की जनगणना सामाजिक स्तर पर कराने के साथ मन्दिरों कीगणना का आह्वान करते हुए सम्पूर्ण समाज काआर्थिक  सर्वेक्षण कराकर समाजोपयोगी योजनाओं पर कार्य करने कीप्रेरणा दी।मुनि श्री नेइसे” धर्म बढ़ाओ अभियान “नामदेते हुए कहा कि आज मन्दिरों के निर्माण से अधिक समाज के निर्माण की आवश्यकता है।मुनि श्री के आह्वान से पुरे देश भर में ख़ासकर युवाओं में विशेष उत्साह दिखा। इस अभियान को साकार करनेके लिए एक बेव साइड बनाई गई है—“सेन्सेक्स फ़ॉर जैन्स “प्रमाणिकएप एवं मुनि प्रमाणसागर डॉट नेट पर भी इसकी जानकारी उपलब्ध है।देशभर के लोग इस अभियान से जुड़कर सामग्री जुटा रहें हैं।

दयोदय महासंघ केलिए लाखों रुपए एकत्रित—त्याग धर्म के दिन मुनि श्री की प्रेरणा सेदयोदय महासंघ केलिए लाखों रुपएएकत्रित होगए।यह राशि जीवदया के लिए महासंघ को दी जाएगी ।

अनुकरणीयआदर्श—- कार्यक्रम केमध्य विशिष्ठ अतिथि के रूप में पधारे मुनि श्री प्रमाणसागर जी महराज के भौतिक पिता श्री सुरेन्द्र कुमारजी सेठी का धर्म प्रभावना समिति की ओर से सम्मान किया गया।इस अवसर पर गुणायतन से जुड़े कुछ भक्तों ने श्रद्धेयपिता जी का स्वर्ण मुकुट और हार पहनाकर सम्मान किया।जिसे उन्होंने अन्य मनस्क होकर स्वीकार कर लिया और उनके ज्येष्ठ पुत्र अनिल संगीता सेठी ने उसमें अपनी ओर से एक लाख रुपए की राशि और मिलाकर उसे गुणायतन के लिए समर्पित कर उसे गुणायतन के उपाध्यक्ष नन्दलालछाबड़ा जयपुर को सौंप दिया।सेठी परिवार की इस निष्पृहता पूर्णउदारता की सभी ने सराहना की।

कार्यक्रम के अन्तिम दिन सभी तपस्वियों का सम्मान धर्म प्रभावनासमिति की ओर से किया गया।शिविरार्थियो कीओर से डाक्टर शोभा जैन प्राचार्या जैन कॉलेज विदिशा नेसमिति कीसराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!